लोग कल भी दुखी थे, लोग आज भी दुखी हैं। दुख कभी भी नही मिटेगा क्योंकि वो तो तुम खुद असावधानी से पैदा करते और हिफाज़त से रखते हो।
दुःख तुम्हारी वासनाओं का मैल और पापों का परिणाम भर है। मगर तुम मंदिर जाते हो और सोचते हो कि उसकी कृपा से दुख हट जाएगा, ये दुख और सुख का विधान भी तो उसी का बनाया हुआ है; तब वो खुद ही अपने विधान को कैसे तोड़ेगा ?
तुम पाप और वासनाओं को त्यागो तब बिना मंदिर जाए, बिना गिड़गिड़ाए भी कृपा अनुभव होने लगेगी।
।।जय श्रीकृष्ण।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें