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शनिवार, 10 सितंबर 2011
Kyun hai?
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शुक्रवार, 20 मई 2011
chintan:
chintan: chetna:- आज के समय में भौतिक चाक चिक्य व विज्ञान के चमत्कृत अविष्कारों के चलते मानव जीवन में नैतिकता के मूल्यों का पतन हो चुका है। एक अनजान डगर की ओर बढ़ते क़दम थमने का नाम नहीं ले रहे है। जिस ओर देखो उस ओर दौड़ ही दौड़ है। ना जीवन जी रहे हैं। ना जीवन को समझ रहे हैं।
आज हर घर में दवाओं का उपयोग होने लगा। लगभग हर व्यक्ति दवा का सेवन कर रहा है।
कारण है कि अनियमित जीवन शैली, कुपथ्य का अधिक मात्रा में सेवन, चिंतन में गिरावट।
पाँचों भूतों में से चारों तत्वों का प्रदूषित हो जाना। जल, वायु, पृथ्वी, आकाश।
इनके बिना स्वस्थ जीवन की कल्पना भी बेईमानी है। इक्षाओं को इतना बढ़ा लिया की जीवन भर इक्षाओं को पूरा करने में लगा दिया। पर इक्षाएं फिर भी न पूरी हो पा रहीं हैं।
कारण है की चिंतन का अभाव हो गया जीवन में।
जब तक चिंतन नहीं जागेगा तब तक मनुष्य यूँ ही इक्षाओं की पूर्ती करते हुए ही मरेगा। जीवन जीना और भी असंभव होता चला जायेगा।